- न्यूनतम मजदूरी, बोनस और ईपीएफ के भुगतान में कथित गड़बड़ी पर उठे सवाल; झामुमो नेता नवीन तिर्की ने मांगी सख्त कार्रवाई
- वर्षों तक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मियों के हक का मामला गरमाया, श्रम न्यायालय के आदेश के बावजूद भुगतान में देरी पर प्रशासन से जवाब मांगा
मुकेश रंजन
Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों के न्यूनतम मजदूरी और अन्य वैधानिक अधिकारों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सुरक्षा कर्मियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, बोनस, ईपीएफ सहित अन्य सुविधाओं का कथित रूप से पूरा लाभ नहीं मिलने के मामले में करीब एक करोड़ 88 लाख रुपये की वसूली का आदेश सामने आने के बाद भी कार्रवाई की गति पर सवाल उठ रहे हैं।

मामले को लेकर झामुमो नेता नवीन तिर्की ने बीएयू प्रशासन से जवाबदेही तय करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले कर्मियों के साथ यदि उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित करने की स्थिति बनी है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। संबंधित एजेंसी की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई हो तथा कर्मचारियों के बकाये का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
श्रम न्यायालय तक पहुंचा मामला, फिर भी हक का इंतजार:
बताया गया कि बीएयू में निजी सुरक्षा कर्मियों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी नहीं दिए जाने की शिकायत के बाद मामला श्रम न्यायालय तक पहुंचा। वाद संख्या 63/2023 के माध्यम से उठे मामले में वर्ष 2011 से 2022 तक की अवधि के भुगतान से संबंधित आरोप सामने आए। कर्मियों ने न्यूनतम मजदूरी के साथ साप्ताहिक अवकाश और अन्य वैधानिक सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायत की थी।
न्यायिक प्रक्रिया के बाद संबंधित राशि की वसूली के लिए कार्रवाई का निर्देश दिया गया। इसके बावजूद कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान कब और किस प्रक्रिया से मिलेगा, इसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने से नाराजगी बनी हुई है।
सुरक्षा कर्मियों का हक किसी कीमत पर नहीं दबना चाहिए:
नवीन तिर्की ने कहा कि सुरक्षा कर्मी दिन-रात संस्थानों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। ऐसे कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी और वैधानिक सुविधाओं से वंचित करना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि केवल एजेंसी पर कार्रवाई की बात पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि संस्थान ने कर्मचारियों के भुगतान और श्रम कानूनों के अनुपालन की नियमित निगरानी क्यों नहीं की।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई निजी सुरक्षा एजेंसियां कर्मचारियों से लंबे समय तक सेवा लेने के बावजूद निर्धारित मजदूरी और अन्य सुविधाओं का पूरा भुगतान नहीं करतीं। ऐसे मामलों में प्रशासन को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहने के बजाय जिम्मेदारी तय करते हुए प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
टेंडर प्रक्रिया ने बढ़ाई हलचल:
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा एजेंसी की नई निविदा प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि जिस एजेंसी के विरुद्ध पूर्व में मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हों, उसे दोबारा सरकारी संस्थानों में काम मिलने की प्रक्रिया ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह है कि किसी एजेंसी को नया काम देने से पहले उसके श्रम कानून अनुपालन, कर्मचारियों के वेतन भुगतान, ईपीएफ, बोनस और पुराने विवादों का रिकॉर्ड कितनी गंभीरता से जांचा जाता है। यदि किसी एजेंसी पर कर्मचारियों के वैधानिक भुगतान का मामला लंबित हो, तो उसकी पात्रता और कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया होनी चाहिए।
सोनू मुंडा और नवीन तिर्की ने मांगी उच्चस्तरीय जांच :
झामुमो नेता सोनू मुंडा और नवीन तिर्की ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षा कर्मियों के बकाये की राशि की वसूली के साथ-साथ यह भी सामने आना चाहिए कि मजदूरी भुगतान में कथित गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने दोषी एजेंसी और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई तथा कर्मियों को उनका वैधानिक हक शीघ्र दिलाने की मांग की।
बड़ा सवाल : 1.88 करोड़ की वसूली के बाद भी कार्रवाई कब?
एक तरफ सुरक्षा कर्मियों के बकाये से जुड़ी 1.88 करोड़ रुपये की वसूली का मामला सामने है, दूसरी तरफ संबंधित एजेंसी के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वर्षों तक संस्थान की सुरक्षा करने वाले कर्मियों को अब अपने ही मेहनत के पैसे के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
अब असली सवाल यही है—जब मजदूरी भुगतान का विवाद सामने आ चुका है और बड़ी राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू हो गई है, तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों पर निर्णायक कार्रवाई कब होगी?
गार्डों की मांग साफ है—सिर्फ वसूली का आदेश नहीं, उनके हक की रकम भी चाहिए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी।



