New Delhi : नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण अब युवाओं के लिए काल बनता जा रहा है। दिल्ली सरकार के ताजा आंकड़े कैंसर को लेकर एक डरावनी और चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर अब केवल बुजुर्गों तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि कामकाजी युवा आबादी और बच्चे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।
हर तीसरा मृतक 44 साल से कम उम्र का
बीते 20 वर्षों में दिल्ली में कैंसर से हुई कुल मौतों में हर तीसरा व्यक्ति 44 वर्ष से कम उम्र का था। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में राजधानी में करीब 1.1 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई।
-
वर्ष 2005 में कैंसर से लगभग 2,000 मौतें दर्ज की गई थीं
-
वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 7,400 तक पहुंच गया
दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतों की दर 7 प्रतिशत रही, जो कि जनसंख्या वृद्धि दर से करीब तीन गुना अधिक है।
युवा और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट का सबसे भयावह पहलू यह है कि कैंसर का ग्राफ बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ा है।
-
कुल मौतों में करीब 8 प्रतिशत बच्चे शामिल हैं
-
पिछले 20 सालों में 7,298 बच्चों की मौत
-
15–24 वर्ष आयु वर्ग में 5,415 मौतें
-
सबसे अधिक प्रभावित आयु वर्ग 45–64 वर्ष, जिसकी हिस्सेदारी 41 प्रतिशत रही
जेंडर के आधार पर देखें तो पुरुषों में कैंसर से मृत्यु दर महिलाओं से अधिक पाई गई।
अस्पतालों पर बढ़ता बोझ
कुल कैंसर मौतों में से लगभग 93,000 मौतें अस्पतालों में दर्ज की गईं, जिससे साफ है कि मरीज इलाज के लिए पूरी तरह अस्पतालों पर निर्भर हैं। निजी अस्पतालों में इलाज बेहद महंगा, जबकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भारी दबाव है।
AIIMS डॉक्टर ने बताई दो बड़ी वजहें
AIIMS Delhi के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, दिल्ली में कैंसर बढ़ने के दो मुख्य कारण हैं—
-
जहरीली हवा: प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को भी बढ़ा रहा है।
-
इलाज में देरी: सरकारी अस्पतालों में भीड़ और निजी अस्पतालों की ऊंची फीस के कारण कई मरीजों को समय पर कीमोथेरेपी और रेडिएशन नहीं मिल पाता।
युवाओं में ज्यादा आक्रामक हो रहा कैंसर
डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं में कैंसर न सिर्फ बढ़ रहा है, बल्कि यह अधिक एग्रेसिव (तेजी से फैलने वाला) भी होता जा रहा है, जिससे इलाज और कठिन हो जाता है।
यह रिपोर्ट राजधानी में वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य ढांचे और जीवनशैली को लेकर एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं।

