Mukesh Ranjan
Ranchi :एक समय स्वच्छ भारत मिशन की उपलब्धि माने जाने वाले कांके प्रखंड का सार्वजनिक शौचालय आज शर्मनाक बदहाली का शिकार बन गया है। लाखों की लागत से बना यह ढांचा अब उपेक्षा की धूल में गुम हो चुका है। तस्वीरों में दिख रही टूटती दीवारें, उगी हुई झाड़ियाँ और जंग खाए हैंडपंप बताते हैं कि यह शौचालय अब उपयोग में नहीं, बल्कि उपेक्षा का प्रतीक बन गया है।
गंदगी की गिरफ्त में स्वच्छता का नामोनिशान नहीं
शौचालय के चारों ओर पसरी गंदगी और बढ़ती झाड़ियाँ बीमारियों को न्योता दे रही हैं। हैंडपंप जो पानी का जरिया होना था, खुद बेकार पड़ा है। टूटे हुए दरवाजे और खस्ताहाल दीवारें लोगों के स्वास्थ्य और सम्मान दोनों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही हैं। खासकर महिलाओं को अत्यधिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा – “कब तक झेलें उपेक्षा?”
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शौचालय की दुर्दशा की शिकायतें कई बार प्रशासन तक पहुँचीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक निवासी ने गुस्से में कहा, “अगर मरम्मत नहीं कर सकते थे, तो निर्माण ही क्यों किया गया?” जनता ने अब मांग की है कि इस सार्वजनिक संपत्ति को या तो दुरुस्त किया जाए या फिर जवाबदेह अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
ज़मीनी हकीकत: स्वच्छ भारत मिशन की पोल खोलती तस्वीर
कांके का यह शौचालय देश भर में ऐसी योजनाओं की असल स्थिति को उजागर करता है, जहाँ निर्माण तो हो जाता है लेकिन रखरखाव शून्य होता है। यह केवल संसाधनों की बर्बादी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास की भी हत्या है।
समाधान की मांग – प्रशासन को जगाने का वक्त आ गया है
अब आवश्यकता है तत्काल ठोस कदमों की:
मरम्मत कार्य को प्राथमिकता मिले
स्थायी सफाई की व्यवस्था की जाए

