पेट की समस्याओं का रामबाण इलाज है गोरक्षासन, योग से मिलेगा लाभ

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now New Delhi : अगर पेट स्वस्थ रहे तो शरीर की कई बीमारियां अपने आप दूर हो जाती हैं, लेकिन अनियमित दिनचर्या और तनाव भरी जीवनशैली के कारण आज पेट से जुड़ी समस्याएं आम हो गई

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New Delhi : अगर पेट स्वस्थ रहे तो शरीर की कई बीमारियां अपने आप दूर हो जाती हैं, लेकिन अनियमित दिनचर्या और तनाव भरी जीवनशैली के कारण आज पेट से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं। अपच, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी परेशानियां न केवल दिनचर्या को प्रभावित करती हैं, बल्कि धीरे-धीरे गंभीर रोगों का कारण भी बन सकती हैं। योग विज्ञान के अनुसार, इन समस्याओं का प्रभावी और प्राकृतिक समाधान गोरक्षासन में छिपा है।

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार, गोरक्षासन पेट की कार्यप्रणाली को सुधारने के साथ-साथ संपूर्ण स्वास्थ्य को मजबूत करता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह आसन नाथ योगियों की प्राचीन परंपरा से जुड़ा हुआ है और इसे एक उन्नत योग मुद्रा माना जाता है। इसका नियमित अभ्यास शरीर, मन और प्राण को संतुलित कर जीवन ऊर्जा को सक्रिय करता है।

गोरक्षासन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है, पेट फूलने और कब्ज की समस्या में राहत मिलती है और एसिडिटी कम होती है। यह आसन कुंडलिनी जागरण, मानसिक स्थिरता और एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। जो लोग ध्यान में बैठने या लंबे समय तक स्थिर रहने में परेशानी महसूस करते हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी है।

गोरक्षासन करने की विधि भी अपेक्षाकृत सरल है। सबसे पहले जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने फैलाएं। फिर पैरों को मोड़कर तलवों को आपस में मिलाएं और एड़ियों को नितंबों की ओर खींचें। इसके बाद एड़ियों पर बैठते हुए घुटनों को जमीन से सटा दें। रीढ़ को सीधा रखें, दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा में घुटनों पर रखें और सामान्य श्वास-प्रश्वास के साथ इस स्थिति में स्थिर रहें। शुरुआत में 1–2 मिनट अभ्यास करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित अभ्यास से डायजेशन सिस्टम मजबूत होता है, प्रोस्टेट ग्रंथि की कार्यक्षमता बेहतर होती है, कमर और पैरों के दर्द में राहत मिलती है और ध्यान लगाने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। इसी कारण इसे “सिद्ध आसन” भी कहा जाता है, जो साधना और ध्यान करने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी माना गया है।

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