Ranchi : खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने विधेयक को झारखंड के हितों के खिलाफ बताते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि खनिज झारखंड का है और जमीन भी झारखंड की है, तो उसके हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी? उन्होंने कहा कि झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा।
12 अगस्त को संसद में हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा लिया। विधेयक के तहत अब कोई भी राज्य खनिजों पर अतिरिक्त कर नहीं लगा सकेगा।
हेमंत सोरेन ने विधेयक को बताया अन्याय
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपना और अपनी पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास कराकर केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैर काटने का काम किया है।
उन्होंने इसे काला बिल बताते हुए कहा कि यह झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय है। उनके मुताबिक, इससे राज्य के विकास और भविष्य पर बड़ा कुठाराघात होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा।
योजनाओं पर असर पड़ने का जताया दावा
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के कानून बनने से झारखंड सरकार की कई योजनाओं पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, जैसे मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाएं बंद होने के कगार पर आ जाएंगी।
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इस विधेयक का पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने यह काला बिल वापस नहीं लिया तो झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा।
हर जिले और प्रखंड में विरोध की चेतावनी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक पंचायत और प्रत्येक शहर में विधेयक का कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार नहीं चेती और झारखंड तथा झारखंडियों को उनका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटेगा।
विधेयक में क्या है प्रावधान?
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राज्य सरकार खनिज अधिकारों पर किसी भी प्रकार का कर, उपकर या कोई अन्य शुल्क नहीं लगा सकेगी, चाहे वह किसी भी नाम से लिया जाए।
ये प्रावधान केवल खनिज अधिकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खनिज-युक्त भूमि पर भी लागू होंगे। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अनुसार खनिज की मात्रा, उसके मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर ऐसी भूमि के संबंध में कर या शुल्क लगाया जा सकेगा।
इसके लिए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम में एक नई धारा जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि 2026 के संशोधन अधिनियम के लागू होने से पहले यदि कोई कर, उपकर या अन्य शुल्क राज्य सरकार के पास जमा नहीं किया गया है या उसकी वसूली नहीं हुई है, तो उसे हर दृष्टि से अवैध माना जाएगा।
हालांकि, इसी तारीख से पहले खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर लगाया गया कोई कर, उपकर या शुल्क यदि राज्य सरकार के पास पहले ही जमा हो चुका है या वसूल किया जा चुका है, तो उसे वापस नहीं किया जाएगा।










