झंडों से सजी ज़मीन, गूंजते नारे: नगड़ी की धरती पर रिम्स-2 के खिलाफ जनसंग्राम

मुख्य संवाददाता Ranchi : कांके प्रखंड के नगड़ी की उपजाऊ मिट्टी एक बार फिर जनसंघर्ष की तपिश से दहक उठी। रिम्स-2 अस्पताल के निर्माण के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण खेतों में उतर आए। हाथों में झंडे, माथे

झंडों से सजी ज़मीन, गूंजते नारे: नगड़ी की धरती पर रिम्स-2 के खिलाफ जनसंग्राम
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मुख्य संवाददाता
Ranchi : कांके प्रखंड के नगड़ी की उपजाऊ मिट्टी एक बार फिर जनसंघर्ष की तपिश से दहक उठी। रिम्स-2 अस्पताल के निर्माण के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण खेतों में उतर आए। हाथों में झंडे, माथे पर संकल्प और होंठों पर विरोध के नारे – यह दृश्य किसी आंदोलन की नहीं, बल्कि ज़मीन से जुड़ी अस्मिता की हुंकार थी।

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झंडों से सजी ज़मीन, गूंजते नारे: नगड़ी की धरती पर रिम्स-2 के खिलाफ जनसंग्राम
झंडों से सजी ज़मीन, गूंजते नारे: नगड़ी की धरती पर रिम्स-2 के खिलाफ जनसंग्राम

सुनगुनाया जनसंघर्ष, लहराए झंडे
भू-नापी कार्य जैसे ही आरंभ हुआ, ग्रामीणों का जनसैलाब खेतों की ओर उमड़ पड़ा। हर ओर हरे-लाल झंडों की कतारें दिखाई दीं – जो प्रशासन को यह स्पष्ट संदेश दे रही थीं कि ‘यह ज़मीन हमारी है’। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा – सभी ने एक स्वर में कहा कि वे अपनी उपजाऊ भूमि किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।

झंडों से सजी ज़मीन, गूंजते नारे: नगड़ी की धरती पर रिम्स-2 के खिलाफ जनसंग्राम
झंडों से सजी ज़मीन, गूंजते नारे: नगड़ी की धरती पर रिम्स-2 के खिलाफ जनसंग्राम

बिना संवाद नहीं विकास” – ग्रामीणों की हुंकार
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप था कि सरकार ने न तो ग्रामसभा की सहमति ली, न ही वैकल्पिक पुनर्वास का कोई खाका प्रस्तुत किया। ग्रामीणों ने कहा कि यह सीधा-सीधा उनकी आजीविका, पहचान और परंपरा पर हमला है।

प्रशासन गायब, भरोसे की डोर टूटी
स्थिति की संवेदनशीलता के बावजूद, मौके पर कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों की नाराज़गी और बढ़ गई। अमीन और स्थानीय कर्मियों की मौजूदगी में मापी को ग्रामीणों ने पूरी तरह खारिज कर दिया। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने मापी के निशानों को मिटा दिया और झंडे गाड़ दिए।

संवाद विफल, संघर्ष की चेतावनी
प्रशासन द्वारा संवाद की कोशिश की गई, लेकिन ग्रामीणों ने किसी भी प्रस्ताव को सुनने से इनकार कर दिया। उनका साफ़ कहना है – जब तक हमारी बात नहीं सुनी जाएगी, संघर्ष रुकेगा नहीं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

नगड़ी: विकास बनाम विस्थापन की जमीनी लड़ाई का अगला मोर्चा
रिम्स-2 जैसी बड़ी परियोजना को लेकर सरकार जहां स्वास्थ्य ढांचे के सुदृढ़ीकरण की बात कर रही है, वहीं ग्रामीण इसे अपने अस्तित्व पर संकट मान रहे हैं। नगड़ी एक बार फिर उस चौराहे पर खड़ा है, जहाँ एक ओर ‘विकास’ है और दूसरी ओर ‘विस्थापन’।

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