अब ग्राहक चुनेगा रंग-डिज़ाइन, AI तैयार करेगा साड़ी; बुनकर करेंगे बुनाई

New Delhi : भारत की सदियों पुरानी साड़ी बुनाई परंपरा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। टाटा समूह की एआई आधारित ‘डिजिटल लूम’ तकनीक टेक्सटाइल सेक्टर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह स्मार्ट करघा पारंपरिक

अब ग्राहक चुनेगा रंग-डिज़ाइन, AI तैयार करेगा साड़ी; बुनकर करेंगे बुनाई
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New Delhi : भारत की सदियों पुरानी साड़ी बुनाई परंपरा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। टाटा समूह की एआई आधारित ‘डिजिटल लूम’ तकनीक टेक्सटाइल सेक्टर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह स्मार्ट करघा पारंपरिक हथकरघा कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए बुनाई की प्रक्रिया को और अधिक सटीक, तेज और सुविधाजनक बना रहा है।

अपनी पसंद की साड़ी, ग्राहक खुद करेगा डिज़ाइन

इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब ग्राहक खुद अपनी पसंद के रंग, डिज़ाइन और पैटर्न चुन सकता है। ग्राहक के इनपुट के आधार पर AI तुरंत साड़ी का डिज़ाइन तैयार कर देता है, जिसे बुनकर डिजिटल लूम की मदद से बुनते हैं। इससे साड़ी पूरी तरह कस्टमाइज़्ड बन रही है।

बुनाई के दौरान रियल-टाइम गाइडेंस

डिजिटल लूम बुनाई के समय रियल-टाइम गाइडेंस देता है। यानी अगर बुनाई के दौरान कोई छोटी-सी गलती होती है, तो सिस्टम तुरंत बुनकर को अलर्ट कर देता है। इससे गलती उसी समय सुधार ली जाती है और समय व मेहनत दोनों की बचत होती है।

पहले किसी छोटी गलती को ठीक करने में करीब 20 मिनट तक का समय लग जाता था, लेकिन अब AI की मदद से ऐसी गलतियां लगभग खत्म हो गई हैं।

कांचीपुरम के बुनकरों ने अपनाई तकनीक

दुनियाभर में मशहूर कांचीपुरम की सिल्क साड़ियों के बुनकरों ने इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। कांचीपुरम साड़ियां अपनी बारीक बुनावट और जटिल डिज़ाइनों के लिए जानी जाती हैं, जहां सटीकता बेहद जरूरी होती है। डिजिटल लूम इस सटीकता को बनाए रखने में बुनकरों की बड़ी मदद कर रहा है।

स्थानीय बुनकरों का कहना है कि यह तकनीक उनकी कला को खत्म नहीं कर रही, बल्कि एक सहायक की तरह काम कर रही है, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हो रहे हैं।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बड़ा बदलाव

विशेषज्ञों के मुताबिक, AI आधारित डिजिटल लूम भारतीय टेक्सटाइल और हथकरघा उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे

  • उत्पादन की गति बढ़ेगी

  • डिज़ाइन में त्रुटियां कम होंगी

  • कारीगरों की मेहनत आसान होगी

  • और ग्राहकों को मनचाही साड़ी मिलेगी

परंपरा और तकनीक के इस मेल से भारत की साड़ी अब सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ आधुनिक नवाचार की पहचान भी बन रही है।

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