New Delhi : संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है, जो आगामी 21 अगस्त तक चलेगा। सत्र के सुचारु संचालन और मुद्दों पर चर्चा को लेकर रविवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राज्यसभा में सदन के नेता और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने की।
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बैठक में केंद्र सरकार के साथ-साथ कांग्रेस, एनसीपी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली, जिसमें विपक्ष की ओर से कई गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की मांग उठाई गई।
कांग्रेस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’, मणिपुर की स्थिति, बिहार में मतदाता सूची के सघन पुनरीक्षण, और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत के आंतरिक मामलों में कथित दखल जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे जवाब की मांग की। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने बताया कि पार्टी इन सभी मुद्दों को लेकर सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है।
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने बैठक के बाद कहा कि सरकार हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन वह संसद के नियमों और परंपराओं के तहत ही चर्चा को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक तरीके से सत्र को सफल बनाने में सहयोग करना चाहिए।
इस मानसून सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों को पारित करवाने की तैयारी में है, जिसमें व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, जनसंख्या नियंत्रण प्रस्ताव, और समान नागरिक संहिता से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं। वहीं विपक्ष का रुख साफ है कि वह जनहित के मुद्दों पर सरकार को सदन में घेरने का प्रयास करेगा।
सत्र के दौरान मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में उठाए गए कदमों पर भी सरकार से रिपोर्ट पेश करने की मांग की जा रही है।
संसद का यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह लोकसभा चुनाव 2024 के बाद का पहला पूर्ण सत्र है और इसमें नए सांसदों की भी भागीदारी देखी जाएगी।

