Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े कथित नियुक्ति घोटाले की जांच अब अहम दौर में पहुंचती दिख रही है। अब तक हुई पूछताछ और गिरफ्तारियों से मिले इनपुट के आधार पर CID की नजर मामले में कथित रूप से जुड़े प्रभावशाली लोगों पर है।
TDPL के जरिए बड़े नामों तक पहुंचने की कोशिश
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, TDPL में हुई कथित गड़बड़ियों में कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की भूमिका अहम बताई जा रही है। हालांकि, CID को मिले इनपुट के मुताबिक वह भी कथित तौर पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति के निर्देश पर काम कर रहा था।
जांच एजेंसी को यह जानकारी मिलने की बात सामने आई है कि TDPL ने झारखंड के एक रसूखदार व्यक्ति को कथित तौर पर अपना पार्टनर बनाया था और कंपनी में नीचे के स्तर पर काम करने वाले लोगों को निर्देश उसी माध्यम से दिए जाते थे। हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
JPSC के तीन सदस्यों को समन
इसी कड़ी में CID ने JPSC के तीन सदस्यों—डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। तीनों से सोमवार से अलग-अलग पूछताछ किए जाने की जानकारी है।
तीनों सदस्यों की नियुक्ति 2 सितंबर 2021 को हुई थी।
CID यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आयोग के भीतर परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं के बारे में इन सदस्यों को क्या जानकारी थी और पूरी प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका रही। उनके बयानों का मिलान दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य आरोपियों से मिली जानकारी से किया जाएगा।
पूर्व JPSC अध्यक्ष से भी हो चुकी है पूछताछ
CID इस मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से पहले भी कई बार पूछताछ कर चुकी है। जांच के शुरुआती दौर में उनके आवास और कार्यालय पर छापेमारी भी की गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
वहीं, TDPL के निदेशक और मार्केटिंग मैनेजर को भी CID पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ से भी जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण जानकारी मिलने का दावा किया गया है।
अब तक 19 गिरफ्तारियां
CID के अनुसार, मामले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें JPSC के पूर्व अध्यक्ष के यहां काम कर चुका कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र और TDPL का लेखापाल रक्षक सिंह भी शामिल हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में दोनों से महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की बात सामने आई है। आरोप है कि उन्हें आयोग में कथित गड़बड़ियों की जानकारी थी। जांच में कंप्यूटर डेटा और OMR शीट से कथित छेड़छाड़ में उनकी भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच
CID ने दोनों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और कथित अनियमितताओं के लिए निर्देश किस स्तर से दिए जा रहे थे।
2,000 OMR शीट की जांच
14वीं JPSC परीक्षा के अभ्यर्थियों ने CID को करीब 2,000 OMR शीट उपलब्ध कराई हैं। इनकी जांच की जा रही है। संदिग्ध OMR शीट को आगे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की तैयारी है।
CID इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, OMR शीट, मोबाइल फोन और आरोपियों के बयानों को आपस में जोड़कर कथित गड़बड़ी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। जांच का दायरा झारखंड से बाहर तक बढ़ने की भी बात सामने आ रही है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर चल रही जांच
JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर की जा रही है। मुख्यमंत्री की ओर से पहले ही कहा गया है कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
अब JPSC के तीन सदस्यों से होने वाली पूछताछ को जांच की अगली अहम कड़ी माना जा रहा है। CID यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताओं में निचले स्तर पर काम करने वाले लोगों के पीछे कौन लोग थे और उन्हें निर्देश आखिर कहां से मिल रहे थे।



