Ranchi : सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा, रांची में चल रहे छह दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग सह कार्यशाला के तीसरे दिन का कार्यक्रम सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, पुष्पार्चन एवं सरस्वती वंदना के साथ की गई। प्राथमिक खंड की आचार्या रीना देवी ने एकल गीत “यह देश हमारा है” की मधुर प्रस्तुति देकर वातावरण को भावनात्मक स्पर्श प्रदान किया। इसके उपरांत वैचारिक सत्र में शिशु विकास मंदिर समिति के सह मंत्री डॉ. धनेश्वर महतो ने “आचार्यत्व वृत्ति नहीं व्रत है” विषय पर प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। उन्होंने आचार्य के कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि एक आचार्य को अपने दायित्वों के प्रति सदैव कर्तव्यनिष्ठ रहना चाहिए।

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इसके पश्चात समिति के सदस्य आशीष नाथ शाहदेव ने विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “व्रत का अर्थ है संकल्प, नियम, निष्ठा, समर्पण और आत्म अनुशासन। शिक्षण केवल एक जीविका का माध्यम नहीं, बल्कि यह सेवा और समर्पण का कार्य है।” चर्चा सत्र में “आचार्यों के मध्य आपसी सहयोग और सद्भावना” विषय पर सभी आचार्यों ने सक्रिय सहभागिता दिखाई तथा अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। चर्चा सत्र के प्रवक्ता ने विषय की समग्रता को प्रस्तुत करते हुए सारगर्भित निष्कर्ष पर चर्चा को पहुंचाया। इसके पश्चात शिक्षकों द्वारा आदर्श कक्षा संचालन का प्रदर्शन किया गया, जिसमें उन्होंने विभिन्न शिक्षण विधियों का प्रयोग करते हुए पाठ योजना के अनुसार अध्यापन किया। अंतिम सत्र में आचार्यों को योग, प्राणायाम, आसन एवं खेलों के अभ्यास कराए गए, जिससे शारीरिक और मानसिक संतुलन का विकास हो सके।

इस अवसर पर शिशु विकास मंदिर समिति के सह मंत्री डॉ. धनेश्वर महतो, सदस्य लाल अशोक शाहदेव, आशीष नाथ शाहदेव, विद्यालय के प्राचार्य ललन कुमार, उपप्राचार्य मीना कुमारी सहित सभी आचार्य एवं दीदीजी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

