कांके में यातायात नियमों की उड़ रही धज्जियां, ‘तीसरी आंख’ भी बनी बेबस!

नंबर प्लेट पर पर्दा, हेलमेट से बेपरवाही और नियमों की खुली अनदेखी; कैमरे लगे हैं, लेकिन निगरानी और कार्रवाई पर सवाल मुकेश रंजन Ranchi : राजधानी रांची के कांके की सड़कों पर यातायात नियमों की अनदेखी अब आम होती जा रही है। कहीं दोपहिया वाहन

कांके में यातायात नियमों की उड़ रही धज्जियां, ‘तीसरी आंख’ भी बनी बेबस!
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  • नंबर प्लेट पर पर्दा, हेलमेट से बेपरवाही और नियमों की खुली अनदेखी; कैमरे लगे हैं, लेकिन निगरानी और कार्रवाई पर सवाल

मुकेश रंजन
Ranchi : राजधानी रांची के कांके की सड़कों पर यातायात नियमों की अनदेखी अब आम होती जा रही है। कहीं दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट फर्राटा भर रहे हैं, तो कहीं वाहनों की नंबर प्लेट के साथ मनमानी की जा रही है। नियमों की इस खुलेआम अनदेखी के बीच सबसे बड़ा सवाल यातायात व्यवस्था की निगरानी के लिए लगाई गई ‘तीसरी आंख’ यानी सीसीटीवी कैमरों की प्रभावशीलता पर उठ रहा है।

कांके क्षेत्र में जगह-जगह यातायात निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कैमरे लगातार सक्रिय हैं और उनकी निगरानी प्रभावी तरीके से हो रही है, तो नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखती? लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि कहीं निगरानी की व्यवस्था सिर्फ कैमरे लगाने तक ही तो सीमित नहीं रह गई है।

नंबर प्लेट पर ही ‘काला पर्दा’, पहचान कैसे होगी?

ताजा तस्वीर में एक दोपहिया वाहन की नंबर प्लेट दिखाई दे रही है। प्लेट पर पंजीकरण संख्या का एक हिस्सा काले पदार्थ से ढका नजर आ रहा है। इससे वाहन का पूरा पंजीकरण क्रमांक स्पष्ट रूप से पढ़ना मुश्किल है। नंबर प्लेट वाहन की पहचान का प्रमुख माध्यम होती है। ऐसे में उसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ यातायात निगरानी की पूरी व्यवस्था को चुनौती देती है।

सवाल यह है कि यदि सड़क पर लगे कैमरे ऐसे वाहनों को रिकॉर्ड करते हैं, तो नियमों का उल्लंघन करने वालों तक कार्रवाई की पहुंच कितनी है? यदि कैमरों की निगरानी हो रही है, तो ऐसी नंबर प्लेटें जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बच रही हैं?

कैमरे लगे, फिर भी मनमानी पर लगाम क्यों नहीं?

कांके में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरे को तीसरी आंख माना जाता है। इसका उद्देश्य सड़क पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना और नियम तोड़ने वालों की पहचान में मदद करना है। लेकिन यदि कैमरे सक्रिय होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहता है, तो निगरानी व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात नियमों का पालन कराने के लिए केवल कभी-कभार जांच अभियान पर्याप्त नहीं है। नियम तोड़ने वालों पर लगातार नजर और तत्काल कार्रवाई जरूरी है। खासकर कांके बाजार, प्रमुख चौक-चौराहों और व्यस्त मार्गों पर नियमित जांच अभियान चलाया जाना चाहिए।

हेलमेट से लेकर नंबर प्लेट तक बेपरवाही

दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट के प्रति लापरवाही भी सड़क सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। वहीं, नंबर प्लेट को ढकना, अस्पष्ट रखना या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं रखना यातायात निगरानी को प्रभावित कर सकता है। नियमों का मकसद केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकना और सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

‘तीसरी आंख’ जागे तो बदलेगी तस्वीर

कांके के लोगों की मांग है कि यातायात पुलिस और संबंधित विभाग सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता की नियमित जांच करें और जहां कैमरे खराब हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त कराया जाए। साथ ही कैमरों से मिलने वाले फुटेज के आधार पर नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

कांके की सड़कों पर नियमों की यह बेखौफ मनमानी सिर्फ यातायात व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। कैमरे अगर ‘तीसरी आंख’ हैं, तो उन्हें सिर्फ सड़क देखने वाली आंख नहीं, बल्कि नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने वाली निगरानी व्यवस्था बनना होगा।

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