मुकेश रंजन
Ranchi : जनजातीय समाज से जुड़ल मुद्दा पर एक बेर फेर गरमाहट देखे ला मिलल। जनजातीय समाज के नेता सोमा उरांव कहलथिन कि जऊन आदिवासी अपन पारंपरिक धर्म छोड़के धर्म परिवर्तन कर लेथें, ओमन आदिवासी आरक्षण के अधिकार से वंचित हो जाथें। हुनकर दावा रहे कि एकर समर्थन में तीन अलग-अलग न्यायालय के फैसला मौजूद हे।
सोमा उरांव कहलथिन कि अनुसूचित जनजाति के आरक्षण व्यवस्था जनजातीय समाज के परंपरा, संस्कृति, रीति-रिवाज अउर सामाजिक पहचान के आधार पर देल गेल हे। हुनकर मत रहे कि धर्म परिवर्तन के बाद कानूनी स्थिति पर विचार जरूरी हे, अउर संबंधित न्यायालय के फैसला के पालन होवेक चाही।
हुनकर कहनाम रहे कि सरकार अउर संबंधित संवैधानिक संस्था मन ए विषय पर स्पष्ट नीति अपनावें, ताकि आरक्षण के लाभ संविधान के प्रावधान अनुसार सही पात्र व्यक्ति तक पहुँचे।
सोमा उरांव ए मुद्दा पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाय के बातो कहलथिन। हुनकर अनुसार जनजातीय समाज के संवैधानिक अधिकार, परंपरा अउर सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण खातिर समाज के एकजुट होवेक जरूरत हे।



