धनबाद: जिले के टुंडी प्रखंड में जंगली हाथियों के झुंड ने एक बार फिर ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। जाताखूंटी पंचायत के चरक ढोंगाबेड़ा गांव में करीब 35 हाथियों का दल रात में घुस गया। हाथियों ने कई घरों को नुकसान पहुंचाया और खेतों में खड़ी धान व मकई की फसल को बर्बाद कर दिया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
हाथियों ने करीब एक दर्जन घरों को किया क्षतिग्रस्त
ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों के झुंड ने गांव में पहुंचते ही कई घरों को निशाना बनाया। इस दौरान करीब एक दर्जन घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए। घरों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों के सामने रहने और खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है। हाथियों ने खेतों में भी जमकर उत्पात मचाया। धान और मकई की खड़ी फसल को रौंदने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती पर निर्भर परिवारों के लिए यह नुकसान काफी बड़ा है।
बुजुर्ग को घर से निकालकर दूर फेंका
हाथियों के हमले के दौरान 65 वर्षीय मोती मोहली का घर भी उनकी चपेट में आ गया। बताया गया कि हाथियों ने घर को तोड़ दिया और बुजुर्ग को बाहर निकालकर करीब 200 मीटर दूर ले जाकर फेंक दिया। इस घटना में मोती मोहली का पैर टूट गया। ग्रामीणों ने उन्हें संभाला और इलाज के लिए मदद की व्यवस्था की। घटना के बाद गांव के लोगों में हाथियों को लेकर भय और बढ़ गया है।
वन विभाग से संपर्क नहीं होने पर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के गांव में घुसने के बाद वन विभाग के अधिकारियों से मदद के लिए लगातार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन रात में किसी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया। भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री दिनेश सिंह और मुखिया प्रतिनिधि शक्ति हेम्ब्रम समेत ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हाथियों के बढ़ते खतरे के बीच समय पर वन विभाग की टीम का पहुंचना जरूरी था।
BDO ने मौके पर भेजी प्रशासनिक गाड़ियां
घटना की सूचना मिलने के बाद टुंडी बीडीओ विशाल पांडेय ने स्थिति को गंभीरता से लिया। उन्होंने प्रशासन की दो गाड़ियां मौके पर भेजीं, ताकि ग्रामीणों की मदद की जा सके और स्थिति को नियंत्रित करने में सहायता मिले।
प्रशासन की ओर से मदद पहुंचने के बाद ग्रामीणों को कुछ राहत मिली, लेकिन वन विभाग की देरी को लेकर उनका गुस्सा बरकरार रहा।
छह घंटे तक चला ग्रामीणों का धरना
वन विभाग की कथित लापरवाही से नाराज ग्रामीणों ने घटनास्थल पर ही धरना शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचें और पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत दी जाए। करीब छह घंटे तक चले विरोध के बाद वन विभाग की टीम गांव पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा देने का आश्वासन दिया। इसके अलावा पीड़ितों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
हाथियों के बढ़ते खतरे से ग्रामीण चिंतित
टुंडी क्षेत्र में जंगली हाथियों के लगातार गांवों की ओर आने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। घरों और फसलों को नुकसान के साथ अब लोगों की सुरक्षा का सवाल भी सामने है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।



