धनबाद: कोयलांचल के धनबाद जिले में भू-धंसान का खतरा लगातार चिंता बढ़ा रहा है। जिले का 100 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र भू-धंसान की दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। इस इलाके में करीब 2.3 लाख से 2.75 लाख लोगों के प्रभावित होने की आशंका है। कोयला खनन वाले क्षेत्रों में जमीन के नीचे बनी पुरानी खदानों और भूमिगत खाली हिस्सों के कारण खतरा और गंभीर हो जाता है।
100 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र संवेदनशील
धनबाद में लंबे समय से बड़े पैमाने पर कोयला खनन होता रहा है। खनन के कारण कई जगहों पर जमीन के नीचे खाली हिस्से बन गए हैं। इन क्षेत्रों में जमीन की स्थिरता प्रभावित होने से भू-धंसान की घटनाओं का खतरा बना रहता है। संवेदनशील क्षेत्र 100 वर्ग किलोमीटर से अधिक बताया जा रहा है। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जमीन में दरार पड़ना, अचानक धंसाव होना और घरों को नुकसान पहुंचने जैसी घटनाएं गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।
लाखों लोगों पर मंडरा रहा खतरा
भू-धंसान के संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में बड़ी आबादी रहती है। अनुमान के मुताबिक करीब 2.3 लाख से 2.75 लाख लोग डेंजर जोन में रह रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई इलाकों में आबादी और खनन क्षेत्र एक-दूसरे के काफी करीब हैं। ऐसे में किसी बड़े भू-धंसान की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
पुरानी खदानें बढ़ा रही हैं चिंता
धनबाद के कई इलाकों में लंबे समय से भूमिगत खनन किया जाता रहा है। खनन के बाद जमीन के नीचे खाली जगह रह जाने से कई क्षेत्रों में भूगर्भीय स्थिरता पर असर पड़ता है। समय के साथ इन जगहों पर जमीन बैठने की घटनाएं सामने आती रही हैं। बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि पानी के जमीन में जाने से कमजोर हिस्सों पर दबाव बढ़ सकता है।
पुनर्वास और सुरक्षा बड़ी चुनौती
भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके पुनर्वास का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। डेंजर जोन में बसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि संवेदनशील इलाकों की नियमित निगरानी, जमीन की जांच और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान जरूरी है। साथ ही प्रभावित परिवारों को समय पर चेतावनी और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी
धनबाद में भू-धंसान का खतरा सिर्फ जमीन धंसने तक सीमित नहीं है। इसके साथ घरों, सड़कों, बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा भी जुड़ा है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। लाखों लोगों की आबादी से जुड़े इस खतरे को देखते हुए समय रहते ठोस कदम उठाना ही बड़े हादसे से बचाव का सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है।
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