Ranchi : झारखंड में बालू खनन को लेकर एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने राज्य में 10 जून 2025 से बालू खनन पर छह महीने की पूर्ण रोक लगाने का आदेश दिया है, जो दिसंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा। यह फैसला नदियों की पारिस्थितिकी और भूजल स्तर को बचाने के उद्देश्य से लिया गया है, जो लगातार अवैज्ञानिक खनन से प्रभावित हो रहे हैं।
Also Read : वर्दी में करुणा: रांची में कांके थाना की सराहनीय पहल
NGT ने स्पष्ट किया है कि झारखंड में बालू का खनन बिना पर्यावरणीय स्वीकृति और वैज्ञानिक तरीकों के किया जा रहा है, जिससे न केवल नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, बल्कि जलस्तर भी तेजी से गिर रहा है। इस आदेश के बाद राज्य की सभी नदियों, नालों और जलाशयों से बालू निकासी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
NGT के निर्देशों के अनुसार:
- पुराना बालू स्टॉक भी प्रशासन की निगरानी में रहेगा।
- अवैध खनन या आदेश उल्लंघन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगेगा।
इस फैसले का प्रभाव राज्य के 24 जिलों में प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिलेगा, जिनमें रांची, हजारीबाग, लोहरदगा, गढ़वा, और पलामू जैसे जिले प्रमुख हैं। इन जिलों में निर्माण कार्यों की रफ्तार पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा।
पर्यावरण बनाम आजीविका की बहस:
जहां एक ओर पर्यावरणविद इस निर्णय को ‘नदी बचाओ आंदोलन’ की नई शुरुआत मान रहे हैं, वहीं बालू व्यवसाय से जुड़े व्यापारी और मजदूर इसे रोज़गार पर संकट मान रहे हैं। उन्हें डर है कि बालू की कमी से निर्माण गतिविधियाँ ठप पड़ सकती हैं और बालू की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो सकती है।
प्रशासन सतर्क:
राज्य सरकार ने सभी जिलों के प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने और अवैध खनन पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी स्थिति में आदेश का उल्लंघन न हो।
संभावित प्रभाव:
- निर्माण कार्यों में देरी
- बालू की कीमतों में बढ़ोतरी
- वैकल्पिक निर्माण सामग्री की मांग में इजाफा
- नदियों की सांसों को मिली राहत

