New Delhi : बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और असंतुलित खान-पान आज लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रहे हैं। फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन के कारण शरीर में विटामिन की कमी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर समय-समय पर चेतावनी के संकेत देता है, लेकिन लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे आगे चलकर गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं।
बार-बार होंठ फटना या मुंह के कोनों में दर्दनाक दरारें पड़ना सिर्फ मौसम का असर नहीं, बल्कि यह विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स की कमी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में अंडे, दूध, हरी पत्तेदार सब्जियां और साबुत अनाज को आहार में शामिल करना फायदेमंद होता है।
लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर आना, हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना प्रायः विटामिन बी-12 की कमी से जुड़ा होता है। यह विटामिन रक्त निर्माण और तंत्रिका तंत्र के लिए बेहद आवश्यक है। दूध, दही, पनीर, मछली और अंडे इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर सप्लीमेंट या इंजेक्शन की सलाह देते हैं।
वहीं आंखों की रोशनी कमजोर होना, रंगों की पहचान में परेशानी या रात में कम दिखाई देना विटामिन ए की कमी का संकेत हो सकता है। गाजर, पालक, शकरकंद और हरी सब्जियां इसका प्रभावी समाधान हैं। मसूड़ों से खून आना, घावों का देर से भरना या त्वचा का ज्यादा सूखना विटामिन सी की कमी दर्शाता है, जिसे आंवला, संतरा, नींबू और अमरूद से पूरा किया जा सकता है।
आजकल विटामिन डी की कमी भी आम समस्या बन चुकी है। हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान इसके प्रमुख लक्षण हैं। विशेषज्ञ रोज सुबह कुछ समय धूप में बिताने की सलाह देते हैं। दूध, अंडा और मछली भी इसके अच्छे स्रोत हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक खराब डाइट, पाचन संबंधी बीमारियां, गर्भावस्था, स्तनपान और कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल विटामिन की कमी की मुख्य वजहें हैं। संतुलित आहार, नियमित जांच और विशेषज्ञ की सलाह से सप्लीमेंट लेना सेहत के लिए बेहद जरूरी है।

