मुंह सूखना और लार की कमी: वात-पित्त-अग्नि असंतुलन का संकेत

New Delhi : कई लोग मानते हैं कि ज्यादा पानी पीने से मुंह की सूखापन दूर हो जाएगी, लेकिन कई बार पर्याप्त पानी लेने के बावजूद भी लार कम बनती है और मुंह सूखा रहता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को ‘मुख शोष’ कहा गया

मुंह सूखना और लार की कमी: वात-पित्त-अग्नि असंतुलन का संकेत

New Delhi : कई लोग मानते हैं कि ज्यादा पानी पीने से मुंह की सूखापन दूर हो जाएगी, लेकिन कई बार पर्याप्त पानी लेने के बावजूद भी लार कम बनती है और मुंह सूखा रहता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को ‘मुख शोष’ कहा गया है। लार केवल भोजन को निगलने और पचाने में ही नहीं, बल्कि दांतों की सुरक्षा, मुंह को नम रखने और संक्रमण से बचाव में भी अहम भूमिका निभाती है।

आयुर्वेद के अनुसार, मुंह सूखना और लार की कमी वात, पित्त और अग्नि के असंतुलन से जुड़ी समस्या है। सर्दियों में वात दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है, जिससे शरीर में रूखापन आता है। वहीं पित्त दोष शरीर में गर्मी और जलन को बढ़ाता है। जब इन दोनों दोषों के साथ पाचन अग्नि भी असंतुलित हो जाती है, तो मुंह सूखने और लार कम बनने की समस्या उभरती है, जिसका असर पाचन और समग्र स्वास्थ्य पर पड़ता है।

आयुर्वेदिक घरेलू उपाय

  • घृत पान (घी का सेवन):
    सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में एक चम्मच देसी घी मिलाकर पीने से शरीर की शुष्कता कम होती है और मुंह की सूखापन में राहत मिलती है।

  • मुलेठी चूर्ण:
    मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ दिन में दो बार लेने से गले को ठंडक मिलती है, शरीर की अतिरिक्त गर्मी शांत होती है और लार का निर्माण बढ़ता है।

  • ऑयल पुलिंग:
    दिन में दो बार तिल या नारियल तेल से कुल्ला करने से लार ग्रंथियां सक्रिय होती हैं और दांतों व मसूड़ों की सेहत भी सुधरती है।

  • आंवला रस और धनिए का पानी:
    आंवला का रस पित्त को शांत करता है और लार बनने में सहायक है, जबकि धनिए का पानी पेट की जलन और शरीर की शुष्कता को कम करता है।

आयुर्वेद मानता है कि इन उपायों को नियमित रूप से अपनाने से न केवल मुंह की सूखापन घटती है, बल्कि पाचन शक्ति मजबूत रहती है और शरीर का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है।

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