Ranchi : रातू प्रखंड के तारूप गांव की सड़कें अब केवल रास्ता नहीं, बल्कि गांववासियों के लिए संघर्ष और पीड़ा की प्रतीक बन चुकी हैं। कभी 10 मिनट का सफर अब आधे घंटे का जोखिम भरा सफर बन गया है, जहां हर कदम पर जान जोखिम में रहती है।
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यह सड़क केवल तारूप की नहीं, बल्कि राय, बचरा, पतरातू सहित 50 से अधिक गांवों की जीवनरेखा है। लेकिन यह जीवनरेखा आज मलबे, अधूरे निर्माण और अतिक्रमण के बोझ से दब चुकी है। गली-गली बिखरी ईंट, बालू, अधूरी पाइपलाइन और सड़क किनारे किए गए अवैध निर्माण अब इस रास्ते को दुर्घटना संभावित क्षेत्र बना चुके हैं।
सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जो इस मार्ग पर रोजाना निर्भर हैं:
- गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना एक चुनौती है।
- छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचने में देरी और फिसलन के कारण चोटिल हो रहे हैं।
- दिहाड़ी मजदूरों को हर दिन इस रास्ते से गुजरना पड़ता है, जो अब उनके लिए कमरतोड़ यात्रा बन चुकी है।
बारिश के मौसम में हालत और बिगड़ जाती है। कीचड़ और जलजमाव से यह क्षेत्र दलदल जैसा बन जाता है। आपातकालीन वाहन तक यहां फंस जाते हैं, जिससे किसी भी जिंदगियों के साथ खिलवाड़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
स्थानीय लोग आक्रोश में हैं।
गांववासियों का कहना है कि प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
हर ग्रामीण के मन में अब एक ही सवाल है —
प्रशासन चुप क्यों है?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है? क्या 50 गांवों की पीड़ा और पुकार अनसुनी ही रहेगी?
यह सड़क नहीं, गांवों की सांसे हैं। अगर यही हाल रहा, तो यह एक और सरकारी असफलता की मिसाल बन जाएगी।

