आस्था के महासागर में डूबा रांची : “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजा कथा स्थल, आठ लाख श्रद्धालुओं ने सुनी शिवमहापुराण कथा

“एक लोटा जल, सब समस्याओं का हल” — पशुपति व्रत और दुंदुभीनिर्ह्राद वध प्रसंग ने भक्तों को किया भावविभोर मुकेश रंजन Ranchi : राजधानी रांची में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा आज आस्था, भक्ति और अध्यात्म का विराट संगम बन गई। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं

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  • “एक लोटा जल, सब समस्याओं का हल” — पशुपति व्रत और दुंदुभीनिर्ह्राद वध प्रसंग ने भक्तों को किया भावविभोर

मुकेश रंजन

Ranchi : राजधानी रांची में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा आज आस्था, भक्ति और अध्यात्म का विराट संगम बन गई। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा परिसर “हर-हर महादेव” और “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा। अनुमानतः लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान भोलेनाथ की महिमा का रसपान किया। श्रद्धा से सराबोर वातावरण में भक्त घंटों तक कथा में डूबे रहे और पूरा परिसर शिवमय हो गया।

पूज्य गुरुदेव के ओजस्वी, भावपूर्ण और आध्यात्मिक प्रवचनों ने श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई तक स्पर्श किया। कथा के दौरान गुरुदेव ने पशुपति व्रत के महात्म्य का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और निर्मल भाव से किया गया व्रत जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को समाप्त कर देता है। उन्होंने अपने प्रसिद्ध संदेश — “एक लोटा जल, सब समस्याओं का हल” — के माध्यम से भक्तों को शिव आराधना की सरल लेकिन दिव्य शक्ति का अनुभव कराया।

कथा के दौरान गुरुदेव ने धनबाद निवासी एक व्यक्ति की मार्मिक कथा सुनाई, जिसकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने पूर्ण श्रद्धा के साथ पशुपति व्रत का पालन किया और भगवान शिव की कृपा से उसकी किडनी स्वस्थ हो गई। यह प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल भावुक हो उठा और बाबा भोलेनाथ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

इसके साथ ही गुरुदेव ने दो युवतियों की प्रेरणादायक कथा सुनाई, जो पुलिस सेवा की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम के साथ जब भगवान शिव की कृपा जुड़ जाती है, तब सफलता निश्चित हो जाती है। दोनों युवतियों ने कठोर मेहनत के साथ शिव आराधना की और अंततः सफलता प्राप्त की। गुरुदेव ने युवाओं को संदेश दिया कि जीवन में परिश्रम और प्रभु भक्ति का संतुलन ही वास्तविक सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब एक दंपत्ति का उल्लेख किया गया, जिन्हें विवाह के पच्चीस वर्षों बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। दंपत्ति स्वयं बाबा के दर्शन कर अपनी भावनाएं व्यक्त करने पहुंचे थे। इस प्रसंग ने हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं और पूरा कथा स्थल भावनाओं से भर उठा।

अपने प्रवचन में गुरुदेव ने कहा —

“सिद्ध होना सरल है, लेकिन शुद्ध होना कठिन है।”

उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि मनुष्य को केवल उपलब्धियों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने विचार, व्यवहार और जीवन को भी शुद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव पर अर्पित किया गया जल कभी व्यर्थ नहीं जाता और जो भक्त सच्चे मन से शिवलिंग पर जल चढ़ाता है, उसकी नैया स्वयं भगवान गणेश पार लगाते हैं।

आज की कथा में दुंदुभीनिर्ह्राद वध प्रसंग का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन भी किया गया। गुरुदेव ने बताया कि भगवान विष्णु द्वारा हिरण्याक्ष के वध के बाद उसका पुत्र दुंदुभीनिर्ह्राद प्रतिशोध की अग्नि में जलने लगा और देवताओं तथा ऋषि-मुनियों पर अत्याचार करने लगा। धर्म और यज्ञों को नष्ट करने के उद्देश्य से उसने मायावी रूप धारण कर लोगों में भय फैलाया। एक समय उसने विकराल बाघ का रूप लेकर ब्राह्मणों पर हमला किया। जब धर्म संकट में पड़ा, तब भगवान शिव स्वयं शिवलिंग से प्रकट हुए और उस दैत्य का संहार कर धर्म की रक्षा की। मान्यता है कि जिस स्थान पर भगवान शिव ने दुंदुभीनिर्ह्राद का वध किया, वहीं व्याघ्रेश्वर लिंग की स्थापना हुई।

गुरुदेव ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है और भक्त संकट में पड़ते हैं, तब-तब भगवान शिव स्वयं उनकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। सत्य, श्रद्धा और भक्ति ही जीवन का वास्तविक मार्ग है।

पूरे कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु देर रात तक कथा में लीन रहे तथा भंडारे में भी भारी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सुचारु व्यवस्था बनाए रखने हेतु प्रशासन, स्वयंसेवकों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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