पटना: पटना के चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुंजन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने उनके और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला फर्जी दस्तावेजों और प्रमाण पत्रों के आधार पर बड़ी रकम विदेश भेजे जाने से जुड़ा है। प्राथमिकी में करीब 457 करोड़ रुपये की रकम भारत से बाहर भेजने में कथित तौर पर मदद करने का आरोप लगाया गया है।
यह कार्रवाई आयकर विभाग की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद हुई है। गौरव गुंजन पर लोकसेवक को गलत सूचना देने, कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश के जरिए धोखाधड़ी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है और आरोप साबित होना बाकी है।
मुंबई और बेंगलुरु की कंपनियों पर भी जांच का फोकस
गौरव गुंजन पटना के दीघा इलाके की मिथिला कॉलोनी स्थित दुलार इंक्लेव में रहते हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन पर मुंबई और बेंगलुरु की कुछ कंपनियों की रकम विदेश भेजने के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप है।
आयकर विभाग की जांच में जिन रकमों का उल्लेख किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से:
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बिल्कुल, इसे न्यूज़ आर्टिकल में लगाने लायक साफ-सुथरी टेबल में ऐसे रख सकते हैं:
क्रम कंपनी/व्यक्ति का नाम स्थान विदेश भेजी गई रकम 1 Jokerplus India Private Limited मुंबई ₹195.26 करोड़ 2 Insure Assist and Technology Private Limited बेंगलुरु ₹193.52 करोड़ 3 Films@50 मुंबई ₹111.73 करोड़ 4 Dharmesh Technology मुंबई ₹9.68 करोड़ 5 Evolox Infotech Private Limited ओडिशा ₹20.41 करोड़ 6 Vikritai Technologies and Media Private Limited जानकीपुरम ₹11.33 करोड़ 7 NRI संजीव कुमार सिंह — ₹31 लाख
प्राथमिकी के अनुसार, इन कंपनियों और संबंधित व्यक्ति की रकम अलग-अलग अवधि में विदेश भेजे जाने की बात सामने आई है।
देशव्यापी सत्यापन अभियान में सामने आया मामला
यह पूरा मामला आयकर विभाग के एक व्यापक सत्यापन अभियान के दौरान सामने आया। विभाग ने इस अभियान के तहत पटना के अलावा मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद और चेन्नई समेत कई शहरों में जांच की थी। इस दौरान कुल 394 इकाइयों और 36 पेशेवरों की गतिविधियों का सत्यापन किया गया। इसी जांच के क्रम में गौरव गुंजन से जुड़े लेनदेन और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आई। इसके बाद 18 अगस्त 2026 को पटना स्थित गौरव गुंजन के फ्लैट में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई। तलाशी के दौरान सामने आए तथ्यों और आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू हुई।
बिना पर्याप्त सत्यापन के प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप
EOU की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि गौरव गुंजन ने विदेश रकम भेजने से संबंधित दस्तावेजों की आवश्यक जांच किए बिना प्रमाण पत्र जारी किए। विदेश में पैसा भेजने की प्रक्रिया में कई दस्तावेजों और सूचनाओं का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। इनमें भुगतान का उद्देश्य, संबंधित पक्षों के बीच समझौता, लाभार्थी की जानकारी, निवास संबंधी दस्तावेज और टैक्स से जुड़े विवरण शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन पहलुओं का पर्याप्त सत्यापन किए बिना प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिनके आधार पर बड़ी रकम विदेश भेजी गई।
क्या होता है Form 15CB?
Form 15CB विदेश में किए जाने वाले कुछ कर-योग्य भुगतानों से जुड़ा टैक्स प्रमाण पत्र है। इसे चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा तैयार किया जाता है और इसमें भुगतान की प्रकृति, लागू टैक्स और TDS से संबंधित जानकारी का उल्लेख किया जाता है। विदेशी भुगतान के मामले में यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भुगतान पर लागू कर नियमों का निर्धारण करना जरूरी होता है। इसी तरह के प्रमाण पत्रों के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर इस मामले में जांच की जा रही है।
2023-24 से 2025-26 के बीच का मामला
प्राथमिकी में कथित लेनदेन की अवधि वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच बताई गई है। आयकर विभाग के सहायक निदेशक (अन्वेषण) प्रिंस बाबू मिश्रा के बयान के आधार पर EOU में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब आर्थिक अपराध इकाई पूरे मामले में दस्तावेजों, प्रमाण पत्रों, संबंधित कंपनियों और विदेश भेजी गई रकम की जांच करेगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कथित तौर पर जारी किए गए प्रमाण पत्रों के आधार पर रकम किस प्रक्रिया के तहत विदेश पहुंची और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
आरोपों की जांच जारी
फिलहाल EOU ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गौरव गुंजन और अन्य आरोपितों पर लगाए गए आरोपों की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। FIR में किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होते।



