पटना: बिहार में अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने की सरकारी पहल लगातार आगे बढ़ रही है। वर्ष 2008-09 में शुरू की गई मुख्यमंत्री श्रमशक्ति योजना के तहत अब तक 5,186 युवाओं को विभिन्न रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से 1,191 युवाओं को रोजगार का अवसर भी मिला है।
योजना का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें बाजार की जरूरत के अनुरूप हुनर देकर रोजगार के लिए तैयार करना है। इसके साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने युवाओं की डिजिटल क्षमता बढ़ाने के लिए 11 छात्रावासों में कंप्यूटर लैब भी स्थापित की हैं।
17 वर्षों में 5 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री श्रमशक्ति योजना की शुरुआत वर्ष 2008-09 में हुई थी। पिछले करीब 17 वर्षों में योजना के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों युवाओं को अलग-अलग रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। अब तक 5,186 युवाओं को प्रशिक्षण और 1,191 युवाओं को रोजगार मिलने के आंकड़े बताते हैं कि योजना का फोकस कौशल विकास के साथ रोजगार उपलब्ध कराने पर भी है। सरकार की कोशिश है कि प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को ऐसी दक्षता हासिल हो, जिससे वे नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसरों का भी लाभ उठा सकें।
कौशल विकास के साथ रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री श्रमशक्ति योजना के तहत युवाओं को उनकी क्षमता और वर्तमान रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के जरिए युवाओं में व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर जोर है। इस पहल से युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ने के साथ उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिल रही है। खासकर ऐसे परिवारों के युवाओं के लिए यह योजना महत्वपूर्ण है, जिनके पास रोजगार के लिए आवश्यक तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं।
प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की राह
रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ाता है। कौशल हासिल करने के बाद युवा अपनी योग्यता के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार तलाश सकते हैं। योजना के आंकड़ों में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के साथ रोजगार हासिल करने वाले युवाओं की संख्या भी दर्ज है, जिससे प्रशिक्षण और नियोजन के बीच संबंध को समझा जा सकता है।
11 छात्रावासों में बनीं कंप्यूटर लैब
समय के साथ रोजगार के क्षेत्र में डिजिटल कौशल की अहमियत बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने राज्य के 11 छात्रावासों में कंप्यूटर लैब स्थापित की हैं। इन लैब की सुविधा गया, किशनगंज, कटिहार, दरभंगा, खगड़िया, बेगूसराय, औरंगाबाद, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नवादा और रोहतास के छात्रावासों में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को मिल रही है। कंप्यूटर लैब के जरिए युवाओं को आधुनिक तकनीक से परिचित कराने और उनकी डिजिटल दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
डिजिटल कौशल के लिए विशेष पाठ्यक्रम
कंप्यूटर लैब में युवाओं को डिजिटल मित्र और डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (डीसीए) जैसे पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक से जुड़े कार्यों के लिए सक्षम बनाना है। मौजूदा समय में सरकारी सेवाओं, निजी क्षेत्र और ऑनलाइन कामकाज में डिजिटल दक्षता की बढ़ती जरूरत को देखते हुए इस तरह का प्रशिक्षण युवाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप पहल
आज नौकरी के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं मानी जाती। कंप्यूटर, डिजिटल सेवाओं और तकनीकी कामकाज की जानकारी भी रोजगार की संभावनाओं को प्रभावित करती है। ऐसे में मुख्यमंत्री श्रमशक्ति योजना के साथ कंप्यूटर लैब की पहल युवाओं को बदलते रोजगार बाजार के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
योजना के प्रमुख आंकड़े
| पहल | उपलब्धि |
|---|---|
| योजना की शुरुआत | 2008-09 |
| प्रशिक्षण प्राप्त युवा | 5,186 |
| रोजगार प्राप्त युवा | 1,191 |
| कंप्यूटर लैब | 11 छात्रावास |
| प्रमुख प्रशिक्षण | डिजिटल मित्र, डीसीए |
| लाभार्थी | अल्पसंख्यक समुदाय के युवा |



