पटना: बिहार में बाढ़ से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। राज्य के 15 जिलों में करीब 48.35 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित परिवारों को भोजन, राशन, आवासन और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर राहत कार्य चलाया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में 1,251 कम्युनिटी किचन संचालित किए जा रहे हैं। इनके जरिए अब तक करीब 88.54 लाख लोगों को सुबह-शाम भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अलावा राहत शिविरों में रह रहे हजारों लोगों को भी भोजन और चिकित्सा समेत जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं।
48 लाख से ज्यादा आबादी बाढ़ से प्रभावित
बिहार के 15 जिले इस समय बाढ़ की स्थिति से प्रभावित हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल में बाढ़ का असर देखा जा रहा है। इन जिलों के 87 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में करीब 48.35 लाख की आबादी प्रभावित बताई गई है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ उनके लिए भोजन और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना है।
1,251 कम्युनिटी किचन में तैयार हो रहा खाना
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाना होती है। इसे देखते हुए अलग-अलग जिलों में 1,251 कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं। इन सामुदायिक रसोई के माध्यम से अब तक करीब 88.54 लाख लोगों को सुबह और शाम का भोजन उपलब्ध कराया गया है। इससे बाढ़ प्रभावित परिवारों को मुश्किल हालात में भोजन की चिंता से राहत मिल रही है।
राहत सामग्री का भी बड़े पैमाने पर वितरण
प्रभावित लोगों को भोजन के अलावा जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री भी दी जा रही है। अब तक:
- करीब 3.68 लाख पॉलीथीन शीट वितरित
- लगभग 65,400 ड्राई राशन पैकेट बांटे गए
- करीब 1,400 फूड पैकेट का वितरण
- पशुओं के लिए 12,844 क्विंटल पशुचारा उपलब्ध कराया गया
पॉलीथीन शीट और राशन जैसी सामग्री खासकर उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके घर बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं।
13 राहत शिविरों में 12,260 लोगों को आश्रय
बाढ़ प्रभावितों के लिए राज्य में 13 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में करीब 12,260 लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है। राहत शिविरों में लोगों को आवासन के साथ भोजन और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन की ओर से जरूरत के अनुसार इन शिविरों में अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं।
1,688 नावों से सुरक्षित आवागमन
बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होने से नावें ही आवागमन का प्रमुख साधन बनी हुई हैं। लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकालने और जरूरी आवाजाही बनाए रखने के लिए राज्य में 1,688 नावों का परिचालन किया जा रहा है। वहीं, पशुओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को पशुचारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
NDRF और SDRF की टीमें राहत अभियान में जुटीं
आपदा की स्थिति से निपटने के लिए राज्य में राष्ट्रीय और राज्य आपदा मोचन बल की टीमें तैनात हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें अलग-अलग जिलों में प्रतिनियुक्त की गई हैं। इन टीमों की मदद से प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और आपात स्थिति में तत्काल बचाव अभियान चलाने पर जोर दिया जा रहा है।
कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
केंद्रीय जल आयोग और मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर घट रहा है, लेकिन कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर घट रहा है। वहीं बलतारा और कुरसेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर है। इसके अलावा श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती तथा दरौली और गंगपुर सिसवन में घाघरा नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
कोसी स्थिर, सोन में गिरावट
रविवार सुबह 10 बजे के आंकड़ों के अनुसार वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई। वहीं वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्तर स्थिर बताया गया है। दूसरी ओर, इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का पानी घट रहा है। नदियों के जलस्तर में हो रहे बदलाव पर प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार नजर बनाए हुए हैं।
राहत कार्य पर प्रशासन की नजर
बाढ़ की चुनौती के बीच सरकार का फोकस प्रभावित आबादी तक समय पर भोजन, राशन और जरूरी सामग्री पहुंचाने के साथ सुरक्षित निकासी पर है। कम्युनिटी किचन, राहत शिविर, नावों और आपदा बल की तैनाती के जरिए राहत अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।



