New Delhi : बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण गैस, अपच, पेट फूलना और बार-बार हिचकी आज आम समस्या बन चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब डायफ्राम अचानक सिकुड़ता है और पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तब हिचकी आती है। बहुत ज्यादा या जल्दी-जल्दी खाना, तला-भुना भोजन, शराब, तनाव और घबराहट इस परेशानी को बढ़ा सकते हैं।
योग शास्त्रों में शरीर के भीतर पांच प्रकार की वायु बताई गई हैं। इनमें अपान वायु का संबंध पेट के निचले हिस्से से होता है, जो मल-मूत्र त्याग, गैस निष्कासन और विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है। जब अपान वायु असंतुलित हो जाती है, तो गैस, कब्ज, अपच और हिचकी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इन्हीं दिक्कतों को दूर करने के लिए अपान वायु मुद्रा को बेहद प्रभावी माना गया है।
अपान वायु मुद्रा कैसे करें?
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जमीन पर आसन लगाकर या कुर्सी पर सीधे बैठें
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रीढ़ की हड्डी सीधी रखें, आंखें बंद करें
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कुछ देर गहरी और धीमी सांस लें
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तर्जनी उंगली मोड़ें
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मध्य और अनामिका उंगली को अंगूठे से मिलाएं
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छोटी उंगली सीधी रखें
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इस मुद्रा में 5–15 मिनट शांत मन से सांस पर ध्यान रखें
कैसे देती है हिचकी और गैस से राहत?
योग एवं आयुष विशेषज्ञों के मुताबिक, अपान वायु मुद्रा से हाथों की उंगलियों के जरिए विशेष ऊर्जा बिंदु सक्रिय होते हैं। इससे पेट और छाती के बीच संतुलन बनता है, डायफ्राम रिलैक्स होता है और हिचकी धीरे-धीरे खुद रुक जाती है। साथ ही यह मुद्रा पेट में फंसी गैस को बाहर निकालने और पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करती है।
अपान वायु मुद्रा के फायदे
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गैस, अपच और हिचकी से राहत
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कब्ज और एसिडिटी में सुधार
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पाचन तंत्र मजबूत
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हृदय स्वास्थ्य और रक्त संचार में लाभ
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मानसिक शांति और तनाव में कमी
सलाह: रोजाना खाली पेट या भोजन के 2–3 घंटे बाद इस मुद्रा का अभ्यास करें। किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर/योग विशेषज्ञ की सलाह लें।

