Patna: बिहार के 700 सरस्वती विद्या निकेतनों में अगले तीन महीने में बड़ा बदलाव दिखना चाहिए। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शुक्रवार को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित प्रधानाध्यापकों की एक दिवसीय कार्यशाला में यह बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षक बदलाव के सबसे महत्वपूर्ण वाहक हैं और प्रधानाध्यापकों को अपने नेतृत्व से विद्यालयों में सकारात्मक वातावरण तैयार करना होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरस्वती विद्या निकेतन बिहार की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और बेहतर शैक्षणिक माहौल विकसित करने पर सरकार का विशेष जोर है।
तीन महीने बाद 700 विद्यालयों का होगा विश्लेषण
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि तीन महीने बाद राज्य के सभी 700 सरस्वती विद्या निकेतनों के कामकाज और बदलाव का विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से कहा कि यह अवधि उनके लिए खुद को साबित करने का अवसर है। उन्होंने यह भी कहा कि करीब एक साल बाद जेईई और नीट के परिणाम आने पर विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करने पर जोर
शिक्षा मंत्री ने गुरु-शिष्य परंपरा को फिर से मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से कहा कि शिक्षक अपने आचरण और व्यवहार के जरिए विद्यार्थियों के सामने उदाहरण पेश करें। विद्यालयों में अनुशासन स्थापित करने के साथ शैक्षणिक नेतृत्व विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों के साथ आत्मीय और जीवंत संबंध बनाने पर भी जोर दिया। मंत्री ने कहा कि विद्यालय और समाज के बीच मजबूत जुड़ाव से बच्चों की शिक्षा और विकास को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता जरूरी
कार्यशाला के दौरान वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी शिक्षा मंत्री ने दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी एक से अधिक कर्मियों को दी जानी चाहिए, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही हर काम के लिए संबंधित व्यक्ति की जवाबदेही तय करने को कहा।
बाल सुरक्षा और समावेशी शिक्षा पर फोकस
मिथिलेश तिवारी ने चेतना सत्र के दौरान बच्चों को बाल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और विद्यालयों की बेहतर व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा। मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के लिए समावेशी शिक्षा जरूरी है, जिससे प्रत्येक बच्चे को समान अवसर मिल सके। उन्होंने विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों और तकनीक के सकारात्मक इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही। शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने का निर्देश दिया।
‘मेरा विद्यालय-मेरा स्वाभिमान’ पोर्टल लॉन्च
कार्यशाला के दौरान शिक्षा मंत्री ने विभाग के सचिव राजीव रौशन और अन्य अतिथियों के साथ ‘मेरा विद्यालय-मेरा स्वाभिमान पोर्टल’ और कक्षा अवलोकन टूल की लॉन्चिंग की। इसके अलावा ‘कॉरियर मार्गदर्शन एवं परामर्श’ पुस्तिका का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में एससीईआरटी और स्वयंसेवी संस्था लाही के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हुए।
बेहतर परिणाम के संकल्प के साथ लौटने की अपील
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का पूरा फोकस आदर्श विद्यालयों पर है। विद्यालयों को बेहतर सुविधाओं से लैस करने के साथ ऐसा माहौल तैयार करना लक्ष्य है, जहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और बेहतर परिणाम सामने आएं। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से संकल्प के साथ अपने विद्यालय लौटने और बिहार के भविष्य निर्माण में योगदान देने की अपील की। विभाग के सचिव राजीव रौशन ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए वर्तमान को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि सरस्वती विद्या निकेतन केवल भवन नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य निर्माण के केंद्र हैं। इन विद्यालयों में किए गए अच्छे प्रयास दूसरे विद्यालयों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं। कार्यशाला में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष त्यागराजन एसएम, विशेष सचिव धर्मेन्द्र कुमार, माध्यमिक शिक्षा निदेशक नितिन कुमार सिंह, प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार निशांत विवेक, एससीईआरटी निदेशक यतेंद्र कुमार पाल, मध्याह्न भोजन निदेशक विनायक मिश्र, निदेशक प्रशासन विजय कुमार पांडेय, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक अमित कुमार समेत कई अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।



