New Delhi : भारतीय योग परंपरा में ऐसे अनेक योगासन बताए गए हैं, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हीं में से एक प्रभावशाली योगासन है पादहस्तासन, जिसे पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से अपच, कब्ज, गैस और पेट की अन्य समस्याओं में काफी सुधार देखा जा सकता है।
पादहस्तासन सूर्य नमस्कार का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसे करने से शरीर सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करता है, जिससे प्राणशक्ति बढ़ती है। यह आसन पेट की मांसपेशियों पर गहरा प्रभाव डालता है और पाचन क्रिया को सक्रिय बनाए रखता है। जब शरीर आगे की ओर झुकता है, तो पेट और आंतों पर दबाव पड़ता है, जिससे गैस और अपच की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।
आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने, मोबाइल और लैपटॉप पर झुके रहने से शरीर का पोस्चर बिगड़ जाता है। पादहस्तासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और शरीर के संतुलन को बेहतर करता है। इससे रक्त संचार में सुधार होता है और थकान भी कम महसूस होती है।
पादहस्तासन करने की विधि
योग मैट पर खड़े होकर धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों से पैरों को पकड़ने की कोशिश करें। सिर को घुटनों के पास ले जाएं और कुछ सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें। सामान्य गति से सांस लेते रहें। शुरुआत में 20–30 सेकंड पर्याप्त है, बाद में समय बढ़ाया जा सकता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाली असुविधा को कम करने में भी सहायक है। इसके अभ्यास से सिर की ओर रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे मस्तिष्क और आंखों की कार्यक्षमता बेहतर होती है। साथ ही यह मानसिक तनाव कम करने और मन को शांत रखने में भी उपयोगी है।
योग विशेषज्ञों की सलाह है कि इस आसन को खाली पेट या भोजन के 4–5 घंटे बाद ही करें और किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर या योग प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य लें।

