करमा पूजा को लेकर झारखंड में जोरदार तैयारी, 22 सितंबर को गूंजेंगे मांदर-ढोल; उरांव समाज मनाएगा भव्य पर्व

पूर्वी सिंहभूम में उरांव समाज 22 सितंबर को करमा पूजा मनाएगा। सीतारामडेरा समेत कई क्षेत्रों में पूजा, कथा, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
करमा पूजा को लेकर झारखंड में जोरदार तैयारी
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पूर्वी सिंहभूम: आदिवासी उरांव समाज पूर्वी सिंहभूम की ओर से करमा पूजा महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गयी हैं। रविवार को पुराना सीतारामडेरा स्थित सरना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में समाज के पदाधिकारियों ने पूजा और उससे जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। समाज के राकेश उरांव ने बताया कि 22 सितंबर को भादो एकादशी के अवसर पर पूरे झारखंड में करमा पूजा पारंपरिक उत्साह के साथ मनायी जाएगी।

पूर्वी सिंहभूम जिले में भी सीतारामडेरा, बिरसानगर, उलीडीह, शंकोसाई, बागबेड़ा, जादूगोड़ा और नूतनडीह समेत कई इलाकों में करमा पूजा का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा, कथा, नृत्य और संगीत कार्यक्रम होंगे।

16 सितंबर से शुरू होगी करमा पूजा की प्रक्रिया

समाज की ओर से बताया गया कि करमा पूजा की तैयारियां 16 सितंबर से शुरू होंगी। इस दिन कुंवारे युवक-युवतियां स्वर्णरेखा नदी से बालू लाकर जावा रोपण करेंगे। इसके बाद जावा की प्रतिदिन सुबह और शाम पूजा की जाएगी। करमा पर्व की इस पारंपरिक प्रक्रिया में युवतियों की विशेष भागीदारी रहेगी।

21 सितंबर को होगा जावा जागरण

21 सितंबर की शाम विभिन्न करम अखाड़ों में कुंवारी युवतियों द्वारा जावा जागरण किया जाएगा। इसके बाद 22 सितंबर को मुख्य पूजा का आयोजन होगा। दोपहर करीब तीन बजे करम राजा को आमंत्रित किया जाएगा। मांदर, ढोल और नगाड़े की धुन के बीच करम डाल को अखाड़े तक लाया जाएगा। इसके बाद पाहन द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से पूजा कर करम डाल की स्थापना की जाएगी।

रात में होगी करम राजा की कथा

करमा पूजा के मुख्य दिन रात आठ बजे करम राजा की कथा सुनायी जाएगी। पूजा और कथा के बाद व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपना व्रत खोलेंगे। इसके बाद अखाड़े में रातभर पारंपरिक नृत्य और संगीत का दौर चलेगा। समाज के लोगों के अनुसार, करमा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता का भी महत्वपूर्ण पर्व है।

23 सितंबर को निकलेगा विसर्जन जुलूस

करमा पूजा के अगले दिन यानी 23 सितंबर को दोपहर तीन बजे करम राजा का विसर्जन जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस स्वर्णरेखा नदी तक जाएगा, जहां पारंपरिक तरीके से विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद परना मंडी का आयोजन होगा। इसमें समाज के लोग सामूहिक रूप से शामिल होंगे।

संवाददाता सम्मेलन में ये लोग रहे मौजूद

सरना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में करमा पूजा की तैयारियों को लेकर विस्तार से जानकारी दी गयी। इस मौके पर शालू लकड़ा, संतोष लकड़ा, लखींद्र लकड़ा, बुधु खलखो, बिरसा तिर्की, बुधराम खलखो, प्रकाश कोया, गोपाल टोप्पो और सुखराम लकड़ा समेत समाज के अन्य लोग मौजूद रहे।

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