सहरसा: सदर अस्पताल, सहरसा में एमडीएम खाने के बाद बीमार हुए बच्चों की रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार और अस्पतालकर्मियों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार अभिषेक कुमार ने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर मारपीट, गाली-गलौज, धमकी देने और सामान छीनने का आरोप लगाया है। वहीं, अस्पताल अधीक्षक ने भी पुलिस को आवेदन देकर पत्रकारों पर आपातकालीन वार्ड में इलाज के दौरान व्यवधान उत्पन्न करने और हंगामा करने का आरोप लगाया है।
दोनों पक्षों की ओर से सदर थाना में आवेदन दिए जाने के बाद मामला जांच के दायरे में आ गया है। सहरसा के डीएम दीपेश कुमार ने भी मामले को संज्ञान में लेते हुए सदर एसडीओ और डीपीएम को जांच की जिम्मेदारी दी है।
बीमार बच्चों की रिपोर्टिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद
पत्रकार अभिषेक कुमार के आवेदन के मुताबिक, वह एमडीएम खाने के बाद बीमार हुए बच्चों की खबर की कवरेज के लिए सदर अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे थे। बच्चों का वीडियो बनाने के बाद वह अस्पताल के बाहर बरामदे में खबर से संबंधित पीटीसी कर रहे थे। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी की शिकायत के बाद अस्पताल प्रभारी डॉ. अजीत और डॉ. एसके आजाद वहां पहुंचे। पत्रकार का आरोप है कि इसके बाद उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की गयी तथा धमकी भी दी गयी।
जबरन कमरे में ले जाने का आरोप
पत्रकार ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि कुछ लोगों को मौके पर बुलाया गया और उनके साथ मारपीट की गयी। इसके बाद उन्हें जबरन ओटी की ओर ले जाकर एक कमरे में बंद करने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में कमरे के अंदर उनके साथ मारपीट किए जाने का भी दावा किया गया है। पत्रकार ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए अस्पताल परिसर और ओटी के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित कराने की मांग की है।
पैसे, आभूषण और मोबाइल छीनने का भी दावा
पत्रकार ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान उनकी जेब से करीब 2,500 रुपये, सोने का कान का कुंडल और गले की चेन ले ली गयी। साथ ही माइक और मोबाइल फोन को क्षतिग्रस्त करने का भी आरोप लगाया गया है। उन्होंने एक चिकित्सक पर धमकी देने और कथित तौर पर सुई के जरिये नुकसान पहुंचाने की कोशिश का भी आरोप लगाया है। घटना के बाद चोट लगने पर पत्रकार को इलाज के लिए श्री नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाने की बात कही गयी है।
मेडिकल छात्रों को बाउंसर के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप
पत्रकार की ओर से दिए गए आवेदन में अस्पताल में कुछ मेडिकल छात्रों को कथित तौर पर बाउंसर की तरह इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदन में पूर्व में भी छात्रों से जुड़ी मारपीट की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा आवेदन में डॉ. रोशन लाल की कार्यशैली को लेकर भी कुछ आरोप लगाए गए हैं। पत्रकार ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल अधीक्षक ने भी पत्रकारों पर लगाया आरोप
वहीं, सदर अस्पताल अधीक्षक ने भी सदर थाना में आवेदन देकर पूरे घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष रखा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एमडीएम खाने के बाद बीमार बच्चों को आपातकालीन वार्ड में चिकित्सकीय सलाह और उपचार दिया जा रहा था। अधीक्षक के आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकार बिना पूर्व अनुमति के बच्चों और उनके परिजनों से बातचीत करने लगे। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इससे मरीजों के इलाज में व्यवधान पैदा हो रहा था।
इमरजेंसी वार्ड से बाहर जाने को कहा गया
अस्पताल अधीक्षक के अनुसार, प्रभारी अधीक्षक और अन्य चिकित्सकों ने पत्रकारों से आपातकालीन वार्ड से बाहर जाने का अनुरोध किया था। आवेदन में आरोप है कि कुछ पत्रकारों ने वहां से जाने से इनकार कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि इसी दौरान प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार अभिषेक कुमार लाइव कवरेज करने लगे। आवेदन में चेतन कुमार नामक पत्रकार के मौजूद होने और हंगामा करने का भी आरोप लगाया गया है।
डीएम ने जांच के दिए निर्देश
मामला सामने आने के बाद सहरसा के जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने इसे गंभीरता से लिया है। डीएम ने सदर एसडीओ और डीपीएम को जांच के लिए भेजा है और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। पुलिस स्तर पर भी दोनों आवेदनों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।



