- आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का संकल्प, देशभर में चलेगा जनजागरण अभियान
मुकेश रंजन
Ranchi : मुण्डारी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर रविवार को पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुण्डा शोध संस्थान (टीआरआई), मोरहाबादी में मुण्डारी भाषा समन्वय समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में झारखंड समेत पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और असम से पहुंचे भाषा प्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और भाषा प्रेमियों ने भाग लिया। 200 से अधिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मुण्डारी भाषा को संवैधानिक पहचान दिलाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाने का संकल्प लिया गया।
बैठक में विभिन्न राज्यों में मुण्डारी भाषा की वर्तमान स्थिति, संरक्षण-संवर्धन, शिक्षा में इसके उपयोग और संवैधानिक मान्यता की आवश्यकता पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिनिधियों ने कहा कि मुण्डारी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि मुण्डा समाज के इतिहास, संस्कृति, परंपरा, लोकज्ञान और सामाजिक पहचान की महत्वपूर्ण धरोहर है।
बैठक में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी उपस्थित रहे। उन्होंने मुण्डारी भाषा की संवैधानिक मान्यता को महत्वपूर्ण बताते हुए भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मुण्डारी साहित्य परिषद रांची, भारत मुण्डा समाज, मुण्डा विकास समिति, झारखंड मुण्डा समाज बुंडू, रुम्बुल रांची, जोरंग टाटा, मुण्डा सभा, मुण्डा होड़ो उत्थान मंच, सरना सोतोः संगोम समिति खूंटी, अखिल भारतीय सरना समिति खूंटी, आदिम जाति सेवा मंडल और मुण्डारी भाषा छात्र संघ समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रमुख वक्ताओं में बालकिशन मुण्डा, रविंद्र नाथ मुण्डा, अनिल ओडेया, डॉ. सत्यनारायण मुण्डा, सोमा मुण्डा, एतवा मुण्डा, कुँवर सिंह पाहन, नवोज्योति ओडेया और मानसिद्ध बड़ायुद शामिल थे। छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम से आए प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।
बैठक के अंत में मुण्डारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए व्यापक जनजागरण और संगठित आंदोलन चलाने का सर्वसम्मत संकल्प लिया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि संवैधानिक मान्यता के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर प्रभावी प्रयास करना होगा।



