- सोमा उरांव बोले—करम पर्व हमारी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक; धार्मिक स्थलों पर भी सम्मान सुनिश्चित हो
मुकेश रंजन
Ranchi : करम पर्व और करम राजा के सम्मान को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठनों ने अपनी आवाज बुलंद की है। संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि करम राजा और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक परंपराओं का किसी भी स्थान पर अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर आदिवासी समाज में चर्चा तेज हो गई है।
आदिवासी नेता सोमा उरांव ने कहा कि करम राजा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, प्रकृति-परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि करम पर्व सदियों से प्रकृति, भाई-बहन के स्नेह, सामुदायिक एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता आया है। ऐसे में करम राजा के प्रति किसी भी प्रकार का अपमानजनक व्यवहार समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
उन्होंने कहा कि “करम राजा का चर्च में अपमान नहीं होने देंगे।” उन्होंने संबंधित लोगों से आदिवासी आस्था और परंपराओं का सम्मान करने की अपील की तथा कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हुए सभी समुदायों को एक-दूसरे की मान्यताओं का सम्मान करना चाहिए।
आस्था के सम्मान को लेकर एकजुटता
विभिन्न आदिवासी संगठनों ने कहा कि करम पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत है। संगठनों ने करम पर्व की परंपराओं और प्रतीकों के सम्मान की बात कही।
नेताओं ने कहा कि किसी भी समुदाय की आस्था और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान सामाजिक सौहार्द की बुनियाद है। संगठनों ने प्रशासन से भी ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बरतने और सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की है।



