रांची: झारखंड वन विभाग में सेवानिवृत्ति के बाद भी अधिकारियों से काम लिए जाने और बिना सक्षम आदेश के वन क्षेत्र पदाधिकारियों (FRO) को दूसरे प्रक्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपे जाने का मामला सामने आया है। सबसे गंभीर सवाल वित्तीय अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे हैं। चतरा वन प्रमंडल से जुड़े मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) ने क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (RCCF) से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है।
विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्यभर में सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारियों (रेंजर) से सेवानिवृत्ति के बाद भी काम लिए जाने की शिकायतों की जांच कराने का निर्देश दिया है।
बिना सक्षम आदेश के दूसरे प्रक्षेत्र का काम क्यों?
PCCF की ओर से RCCF से पूछा गया है कि सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बिना वन क्षेत्र पदाधिकारियों से उनके निर्धारित कार्यक्षेत्र से बाहर काम किस आधार पर कराया जा रहा है। सवाल यह भी है कि जिन प्रक्षेत्रों में संबंधित पदाधिकारी की पदस्थापना नहीं है, वहां मजदूरी भुगतान और सामग्री खरीद के लिए वन अग्रिम के जरिए राशि कैसे उपलब्ध कराई जा रही है। विभागीय सचिव के निर्देश के बाद अवर सचिव भन्नू चौधरी ने PCCF को पत्र भेजकर ऐसी व्यवस्थाओं की पहचान करने और तत्काल रोक लगाने को कहा है।
चतरा के चार प्रक्षेत्रों में नहीं है FRO की पदस्थापना
चतरा उत्तरी वन प्रमंडल के मामले में PCCF कार्यालय ने 10 सितंबर को RCCF और संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी से जवाब मांगा है।
बताया गया है कि इन चार प्रक्षेत्रों में संबंधित वन क्षेत्र पदाधिकारी का पदस्थापन नहीं है—
- राजपुर वन प्रक्षेत्र
- कुंदा वन प्रक्षेत्र
- चतरा वनरोपण प्रक्षेत्र
- हंटरगंज वनरोपण प्रक्षेत्र
इसके बावजूद इन क्षेत्रों का काम कराया जा रहा है। विभागीय पत्र के अनुसार किसी सक्षम प्राधिकारी की ओर से दूसरे वन क्षेत्र पदाधिकारी को इन प्रक्षेत्रों का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का आदेश भी जारी नहीं किया गया है। इसी व्यवस्था को लेकर PCCF ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
रिटायर अधिकारियों के वित्तीय अधिकार इस्तेमाल करने पर सवाल
विभाग को शिकायत मिली है कि सेवा अवधि समाप्त होने के बाद भी कुछ सेवानिवृत्त ACF और वन क्षेत्र पदाधिकारियों से काम लिया जा रहा है। इतना ही नहीं, आरोप है कि कुछ मामलों में ऐसे अधिकारियों द्वारा वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। विभाग ने इस स्थिति को नियमों के अनुरूप नहीं माना है। अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी अधिकारी को किस आधार पर जिम्मेदारी या वित्तीय अधिकार दिए गए। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विभागीय पत्र में ऐसी व्यवस्था से भ्रष्टाचार, सरकारी राशि के दुरुपयोग और पद के गलत इस्तेमाल की आशंका जताई गई है।
वन अग्रिम से राशि उपलब्ध कराने पर भी जवाब तलब
चतरा मामले में प्रतापपुर वन प्रक्षेत्र और हंटरगंज वन प्रक्षेत्र को वन अग्रिम के माध्यम से राशि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है। PCCF ने इस पर भी सवाल उठाया है। पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में उनके स्तर पर कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ था। ऐसे में बिना सक्षम आदेश के किसी वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा FRO को उनके निर्धारित क्षेत्र से बाहर काम देना और वन अग्रिम उपलब्ध कराना नियमसंगत है या नहीं, इस पर जवाब मांगा गया है।
रेंजर और ACF की कमी बनी थी वजह
वन विभाग में रेंजर और ACF के पदों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। इसी कमी को देखते हुए पहले सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को छह-छह महीने का सेवा विस्तार दिया जाता रहा था। हालांकि, अब सरकार ने इस तरह का सेवा विस्तार देना बंद कर दिया है। इसके बावजूद सेवानिवृत्त अधिकारियों से काम लिए जाने की शिकायतों ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्यभर में ऐसी शिकायतों की होगी जांच
चतरा के मामले के बाद विभाग अब केवल एक प्रमंडल तक सीमित नहीं रहना चाहता। निर्देश दिया गया है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में यह पता लगाया जाए कि कहीं सेवानिवृत्त ACF या रेंजर से सेवा समाप्त होने के बाद भी काम तो नहीं लिया जा रहा है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि ऐसे अधिकारियों को किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक शक्ति दी गई है या नहीं और उनके माध्यम से सरकारी राशि का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर PIL में भी उठ चुका है मुद्दा
सेवानिवृत्ति के बाद अधिकारियों से काम लेने और उन्हें खर्च के लिए राशि उपलब्ध कराने का मामला न्यायिक स्तर तक भी पहुंच चुका है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में भी शिकायत की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ अधिकारियों को सेवा विस्तार नहीं मिलने के बावजूद खर्च के लिए राशि उपलब्ध कराई जा रही है और संबंधित अधिकारी उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। शिकायत में कोल्हान और संताल परगना प्रमंडल से जुड़े कुछ अधिकारियों का भी उल्लेख किया गया है। अब चतरा मामले में PCCF की ओर से मांगा गया स्पष्टीकरण और राज्यभर में होने वाली जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सेवानिवृत्ति के बाद अधिकारियों को किस आधार पर जिम्मेदारी और वित्तीय अधिकार दिए जा रहे थे।



